शुक्रवार, २४ एप्रिल, २००९

shayari1

आखें खोलू तो चेहरा तुम्हारा हो,
बंद करू तो सपना तुम्हारा हो,
मर भी जाऊ तो कोई गम नही,
अगर कफ़न के बदले आचल तुम्हारा हो.

तन्हाई मे जब बीते लम्हों की याद आती है,
क्या कहे जिस्म से जान चली जाती है,
यूँ तो उनकी बेरुखी याद है हमें,
पैर आँखे बंद करे तो सूरत उनकी नज़र आती है.

ढलती रात का खुला एहसास है,
मेरे दिल मे तेरी जगह कुछ खास है,
तुम नही हो यहाँ मुझे मालूम है,
पर दिल कहता है की तू दिल के पास है.

मेरे चेहरे से उठो दो कफ़न,
मुझे आदत है मुस्कुराने की.
मेरी लाश अभी मत जलना,
मुझे उम्मीद है उनके आने की.

मौसम का इशारा है, हसरतों ने पुकारा है,
कैसे कहे के कितना मिस करते है हम आपको,
ये शायरी उस्सी याद का एक इशारा है.

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