शुक्रवार, २४ एप्रिल, २००९

नींद ...............

नींद आंखों मैं नहीं, ख्वाब खो गए

तनहा ही थे, कुछ और तेरे बिन हम हो गए

दिल कुछ तड़प उठा, जुबान भी लड़खड़ाइ

तेरी याद मैं दो आंसू चुपके से बह गए !

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