शुक्रवार, २४ एप्रिल, २००९

शायरी 3

मुफलिसों के नसीब मे अँधेरा होता है,
उनकी ज़िन्दगी मे न सवेरा होता है,
हर इल्जाम लग जाता है किसी मिस्कीं पे,
के उनकी ज़िन्दगी पे गुरबत का पहरा होता है.

न कोई हमदर्दी जतानेवाला होता है,
न कोई दिलो का हाल पुंछ्नेवाला होता है,
फक्त गरीब होना ही कसूर है किसी मिस्कीं का,
जनाजा भी उसे ख़ुद का आप उठाना होता है.

गुरबत मे जीनेवाला किस कदर तंग होता है,
जैसे कोई नबीना रंगू के लिए तंग होता है,
बहारें मुफलिसों की ज़िन्दगी मे जल्द आती नही,
अगर आजाएं, तो चिन्लेनेवाला ज़माना खड़ा होता है.

आह भरना भी मुफलिसों के लिए सितम होता है,
कोई मेहरबानियों का चलन न उनके साथ होता है.
सजाएं मिलती है बे-खता उनको,
जैसे अब्र का माह मे बरसना होता है…….

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