शुक्रवार, २४ एप्रिल, २००९

बरसात........

आस्मां भी बरस रहा है,
मेरे अश्को से टकरा रहा है,
किस्म है जोर ज्यादा शायद यह देख रहा है,
बरसात तो फिर भी रुक जायेगी,
मेरे अश्को का कोई अंत नही,
दिल मे है दर्द इतने जिसका कोई हिसाब नही.

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