शुक्रवार, २४ एप्रिल, २००९

शायरी 2

मोहब्बत मैं करने लगा हूँ
उलझनों मे जीने लगा हूँ
दीवाना तो मैं था नही,लेकिन
तेरा दीवाना बनने लगा हूँ

प्यार का सफर करने चला हूँ
दिल की दुनिया बसने चला हूँ
मैंने ख्वाब अभी तक न देखे थे
तुझे देख के ख्वाबो मे जीने लगा हूँ

कभी बिखरता जा रहा हूँ
तो कभी सवारता जा रहा हूँ
कत्ल तो मुझे होना नही था,लेकिन
तेरी निगाहूँ से हुए जा रहा हूँ

उनसे दिल लगाये बहता हूँ
उन्हें अपना बनाये बहता हूँ
बस डर रहा हूँ येही सोच-सोच के
आज उनसे इजहार करने जा रहा हूँ

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