नींद आंखों मैं नहीं, ख्वाब खो गए
तनहा ही थे, कुछ और तेरे बिन हम हो गए
दिल कुछ तड़प उठा, जुबान भी लड़खड़ाइ
तेरी याद मैं दो आंसू चुपके से बह गए !
नींद आंखों मैं नहीं, ख्वाब खो गए
तनहा ही थे, कुछ और तेरे बिन हम हो गए
दिल कुछ तड़प उठा, जुबान भी लड़खड़ाइ
तेरी याद मैं दो आंसू चुपके से बह गए !
मुफलिसों के नसीब मे अँधेरा होता है,
उनकी ज़िन्दगी मे न सवेरा होता है,
हर इल्जाम लग जाता है किसी मिस्कीं पे,
के उनकी ज़िन्दगी पे गुरबत का पहरा होता है.
न कोई हमदर्दी जतानेवाला होता है,
न कोई दिलो का हाल पुंछ्नेवाला होता है,
फक्त गरीब होना ही कसूर है किसी मिस्कीं का,
जनाजा भी उसे ख़ुद का आप उठाना होता है.
गुरबत मे जीनेवाला किस कदर तंग होता है,
जैसे कोई नबीना रंगू के लिए तंग होता है,
बहारें मुफलिसों की ज़िन्दगी मे जल्द आती नही,
अगर आजाएं, तो चिन्लेनेवाला ज़माना खड़ा होता है.
आह भरना भी मुफलिसों के लिए सितम होता है,
कोई मेहरबानियों का चलन न उनके साथ होता है.
सजाएं मिलती है बे-खता उनको,
जैसे अब्र का माह मे बरसना होता है…….
मोहब्बत मैं करने लगा हूँ
उलझनों मे जीने लगा हूँ
दीवाना तो मैं था नही,लेकिन
तेरा दीवाना बनने लगा हूँ
प्यार का सफर करने चला हूँ
दिल की दुनिया बसने चला हूँ
मैंने ख्वाब अभी तक न देखे थे
तुझे देख के ख्वाबो मे जीने लगा हूँ
कभी बिखरता जा रहा हूँ
तो कभी सवारता जा रहा हूँ
कत्ल तो मुझे होना नही था,लेकिन
तेरी निगाहूँ से हुए जा रहा हूँ
उनसे दिल लगाये बहता हूँ
उन्हें अपना बनाये बहता हूँ
बस डर रहा हूँ येही सोच-सोच के
आज उनसे इजहार करने जा रहा हूँ
आखें खोलू तो चेहरा तुम्हारा हो,
बंद करू तो सपना तुम्हारा हो,
मर भी जाऊ तो कोई गम नही,
अगर कफ़न के बदले आचल तुम्हारा हो.
तन्हाई मे जब बीते लम्हों की याद आती है,
क्या कहे जिस्म से जान चली जाती है,
यूँ तो उनकी बेरुखी याद है हमें,
पैर आँखे बंद करे तो सूरत उनकी नज़र आती है.
ढलती रात का खुला एहसास है,
मेरे दिल मे तेरी जगह कुछ खास है,
तुम नही हो यहाँ मुझे मालूम है,
पर दिल कहता है की तू दिल के पास है.
मेरे चेहरे से उठो दो कफ़न,
मुझे आदत है मुस्कुराने की.
मेरी लाश अभी मत जलना,
मुझे उम्मीद है उनके आने की.
मौसम का इशारा है, हसरतों ने पुकारा है,
कैसे कहे के कितना मिस करते है हम आपको,
ये शायरी उस्सी याद का एक इशारा है.